अकबर-बीरबल की कहानी: मूर्खों की तलाश|akbar-birbal Ki Kahani: Murkhon Ki Talaash Short Story in Hindi

Smita MahtoMay 11, 2024
birbal ka buddhimani bhada ghada

एक बार की बात है, बादशाह अकबर अपने दरबार में दरबारियों के साथ उपस्थित थे। उन्होंने सोचा कि उनके आस-पास हमेशा बुद्धिमान लोग ही रहते हैं और इससे वे कुछ ऊब महसूस कर रहे थे। उन्होंने निर्णय लिया कि वे कुछ मूर्ख व्यक्तियों से मिलना चाहते हैं। बीरबल से उन्होंने कहा कि वह उनके लिए छह मूर्ख व्यक्ति ढूंढ कर लाएं।

बीरबल ने बादशाह को आश्वासन दिया कि वह उनके लिए मूर्ख व्यक्तियों को खोज लाएगा। बादशाह अकबर ने उन्हें इस कार्य के लिए 30 दिन का समय दिया, लेकिन बीरबल ने कहा कि उन्हें इतना समय नहीं चाहिए। इस पर अकबर ने कहा कि अगर वह पहले ही मूर्ख व्यक्तियों को ढूंढ लाते हैं तो यह उत्तम होगा।

बीरबल ने अपनी खोज शुरू की और रास्ते में उन्होंने एक व्यक्ति को देखा जो गधे पर बैठा था और उसने अपने सिर पर घास की गठरी रखी हुई थी। बीरबल ने उसे रोका और पूछा कि वह ऐसे क्यों जा रहे हैं। उस व्यक्ति ने, जिसका नाम रामू था, बताया कि उसका गधा कमजोर है इसलिए उसने गधे का बोझ हल्का करने के लिए घास की गठरी अपने सिर पर रखी है। बीरबल ने सोचा कि उन्हें पहला मूर्ख मिल गया है। बीरबल ने रामू को बादशाह अकबर से इनाम दिलवाने का वादा किया और उसे अपने साथ चलने को कहा।

आगे चलते हुए बीरबल ने दो व्यक्तियों को आपस में लड़ते हुए देखा। उन्होंने उन्हें रोका और पूछा कि वे किस बात पर लड़ रहे हैं। एक ने अपना नाम चंगु बताया और दूसरे ने मंगू। मंगू ने कहा कि चंगु उसे धमकी दे रहा है कि वह अपने शेर को उसकी गाय पर छोड़ देग

बीरबल पहले दो व्यक्तियों, चंगु और मंगू से मिले, जो गाय और शेर मांगने की अजीबोगरीब बातें कर रहे थे,  उन्हें अपने साथ चलने के लिए कहा, जिसे वे मान गए। फिर बीरबल एक और व्यक्ति से मिले जो अपनी अंगूठी खोज रहा था। उसने बताया कि वह अंधेरे के कारण उस पेड़ के पास जहाँ उसकी अंगूठी गिरी थी, वहाँ नहीं ढूंढ सकता, इसलिए यहाँ ढूंढ रहा है। बीरबल ने उसे भी अपने साथ चलने को कहा।

अगले दिन, बीरबल इन चारों को लेकर दरबार में पहुंचे और बादशाह अकबर को बताया कि वह उनके आदेशानुसार मूर्ख व्यक्तियों को ले आए हैं। बादशाह ने पूछा कि बाकी के दो मूर्ख कहाँ हैं, तो बीरबल ने बताया कि एक वह स्वयं हैं, क्योंकि उन्होंने इन मूर्खों को खोजने में समय बर्बाद किया। और दूसरे बादशाह अकबर हैं, जिन्होंने उन्हें इस काम के लिए कहा।

इस कहानी से सिख मिलती है कि बुद्धि और चतुराई से मुश्किल काम भी आसानी से किये जा सकते हैं, परंतु बेमतलब के कामों में कीमती समय नहीं गंवाना चाहिए।