
टाइगर श्रॉफ की नेट वर्थ ₹250 करोड़: एक्शन, फिटनेस और लग्जरी लाइफ का अनोखा मेल
जानिए कैसे टाइगर श्रॉफ ने अपनी मेहनत और फिटनेस के दम पर बॉलीवुड में बनाई खास पहचान
अगर आप हरियाणा में खेती करते हैं और अपनी फसल MSP पर बेचना चाहते हैं, फसल खराब होने पर मुआवजा लेना चाहते हैं या सरकारी सब्सिडी का फायदा उठाना चाहते हैं, तो मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना ज़रूरी है। यह रजिस्ट्रेशन बिल्कुल फ्री है, fasal.haryana.gov.in पर होता है, और हर सीज़न में दोबारा करना पड़ता है, यानी खरीफ और रबी दोनों के लिए अलग।
| पॉइंट | जानकारी |
|---|---|
| पोर्टल का नाम | मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) |
| विभाग | कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा |
| ऑफिशियल वेबसाइट | fasal.haryana.gov.in |
| रजिस्ट्रेशन फीस | फ्री |
| वैलिडिटी | सिर्फ एक सीज़न |
| हेल्पलाइन | 1800-180-2117, 1800-180-2060 (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे) |
खरीफ 2026 का रजिस्ट्रेशन 20 मई 2026 से शुरू हुआ था और 15 अगस्त 2026 को बंद होना था। बाद में न्यूज़ रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन छूट गया था, उनके लिए हरियाणा सरकार ने पोर्टल 21 से 27 सितंबर 2026 तक दोबारा खोला। रबी 2026-27 की विंडो आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के आसपास खुलती है। सही तारीखों के लिए fasal.haryana.gov.in ज़रूर चेक करें।
मेरी फसल मेरा ब्यौरा हरियाणा सरकार का ऑनलाइन फसल और ज़मीन रजिस्ट्रेशन पोर्टल है, जो 2019 में शुरू हुआ था। इसका नाम ही इसका मतलब बताता है: **"मेरी फसल, मेरा ब्यौरा"**। इस पोर्टल पर किसान बताते हैं कि उन्होंने कौन सी फसल बोई है, कितनी ज़मीन पर बोई है, सिंचाई का स्रोत क्या है और फसल कहां बेचनी है।
पहले फसल का डेटा गांव स्तर के सर्वे से आता था, जो धीमा होता था और कई बार विवाद भी होता था। अब MFMB से एक डिजिटल रिकॉर्ड बनता है, जिसे बाद में मौके पर जाकर वेरिफाई किया जाता है। यही रिकॉर्ड आगे खेती से जुड़े लगभग हर सरकारी फायदे का आधार बनता है। विधानसभा में दिए गए एक जवाब के मुताबिक, खरीफ 2020 से हर सीज़न में करीब 8 से 9 लाख किसान इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराते आ रहे हैं।
बहुत से किसान इसे सिर्फ एक और फॉर्म समझते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। सबसे बड़ा फायदा MSP का है, क्योंकि सरकार ई-खरीद सिस्टम से सिर्फ रजिस्टर्ड किसानों से ही फसल खरीदती है। बिना रजिस्ट्रेशन की फसल MSP पर नहीं बिक सकती। इसके अलावा ओलावृष्टि, बाढ़, जलभराव या कीट-रोग से नुकसान होने पर मुआवजा भी पोर्टल पर दर्ज फसल के आधार पर ही मिलता है।
फसल बीमा (PMFBY) में भी रजिस्टर्ड डेटा काम आता है, क्योंकि इससे बीमा एरिया और असल बुवाई का मिलान हो पाता है। कृषि यंत्र जैसी राज्य सब्सिडी और बागवानी फसलों के लिए भावांतर भरपाई योजना भी इसी पोर्टल से जुड़ी है। और बिक्री के बाद पेमेंट सीधे बैंक अकाउंट में आता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हो जाती है।
एक उदाहरण से समझिए। सुखबीर जी की गेहूं की फसल तैयार थी, लेकिन मंडी पहुंचे तो पता चला कि उस सीज़न रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था, इसलिए MSP पर बिक्री नहीं हो सकती। उनके पड़ोसी ने विंडो के अंदर रजिस्ट्रेशन कराया था और उसी दिन अपनी फसल बेच दी। फसल एक जैसी थी, नतीजा बिल्कुल अलग।
हरियाणा में ज़मीन के मालिक किसान तो रजिस्ट्रेशन कर ही सकते हैं, साथ ही बटाईदार यानी किराए की ज़मीन पर खेती करने वाले किसान भी पात्र हैं। बटाईदार किसानों को ज़मीन मालिक की डिटेल्स और टेनेंसी डिक्लेरेशन देनी होती है। पड़ोसी राज्यों के जो किसान हरियाणा में ज़मीन के मालिक हैं या खेती करते हैं, वे भी रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, लेकिन अप्लाई करने से पहले पोर्टल पर एक बार कन्फर्म कर लें। हर आवेदक के पास आधार नंबर, बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर होना ज़रूरी है।
रजिस्ट्रेशन शुरू करने से पहले आधार कार्ड, परिवार पहचान पत्र (PPP), OTP के लिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और खसरा या खेवट नंबर सहित ज़मीन की डिटेल्स तैयार रखें। इनके साथ बैंक अकाउंट डिटेल्स (आधार-सीडेड अकाउंट सबसे अच्छा रहता है), पासपोर्ट साइज़ फोटो और निवास प्रमाण पत्र भी चाहिए। टेनेंट किसानों को ज़मीन मालिक की डिटेल्स और टेनेंसी डिक्लेरेशन भी साथ रखना होगा। सब कुछ पहले से तैयार होगा तो फॉर्म कुछ ही मिनट में भर जाएगा।
अगर खुद ऑनलाइन करना मुश्किल लगे, तो मेरी फसल मेरा ब्यौरा मोबाइल ऐप इस्तेमाल कर सकते हैं, या नज़दीकी अटल सेवा केंद्र और CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) पर जाकर मदद ले सकते हैं। रजिस्ट्रेशन विंडो के दौरान सरकारी कैंप और फील्ड स्टाफ भी मदद के लिए उपलब्ध रहते हैं। एक प्रो टिप: एकनॉलेजमेंट का स्क्रीनशॉट या प्रिंटआउट ज़रूर रखें, बाद में कोई मिसमैच होने पर काम आएगा।
स्टेटस चेक करना आसान है। fasal.haryana.gov.in पर लॉगिन करें, एप्लिकेशन स्टेटस या फार्मर सर्च ऑप्शन चुनें और अपना PPP या आधार नंबर डालें। स्क्रीन पर आपका रजिस्ट्रेशन, फसल की डिटेल्स और पेमेंट स्टेटस दिख जाएगा। अगर कुछ गलत दिखे, जैसे गलत एरिया, गलत फसल या कोई छूटा हुआ पार्सल, तो उसे विंडो खुली रहते ही ठीक करा लें, क्योंकि विंडो बंद होने के बाद बदलाव करना मुश्किल हो जाता है।
सीज़न का रजिस्ट्रेशन पूरा और वेरिफाई होने के बाद पोर्टल की ई-खरीद सुविधा से अपना खरीद केंद्र चुनें और मंडी के लिए गेट पास लें। तय तारीख पर फसल लेकर मंडी पहुंचें। खरीद के बाद पेमेंट सीधे आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है।
खरीफ में धान, बाजरा, कपास और मक्का जैसी फसलें आती हैं और इसकी विंडो लगभग मई-जून में खुलती है। रबी में गेहूं, सरसों, चना और जौ जैसी फसलें आती हैं और इसकी विंडो आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में खुलती है। दोनों रजिस्ट्रेशन सिर्फ उसी सीज़न के लिए वैलिड होते हैं और अगले सीज़न में अपने-आप कैरी फॉरवर्ड नहीं होते। यानी खरीफ का रजिस्ट्रेशन आपकी गेहूं की फसल के लिए काम नहीं करेगा।
सबसे आम गलती यह मान लेना है कि पिछले सीज़न का रजिस्ट्रेशन अब भी वैलिड है। दूसरी गलती आखिरी दिन तक इंतज़ार करना है, क्योंकि तब पोर्टल स्लो हो जाता है। खसरा नंबर या एरिया गलत भरना, या ऐसा बैंक अकाउंट देना जो एक्टिव या आधार-सीडेड न हो, इनसे भी पेमेंट और मुआवजे में दिक्कत आती है। ऐसी फसल रजिस्टर करने से भी बचें जो असल में बोई ही नहीं, क्योंकि विभाग को फर्जी फसल रजिस्ट्रेशन की शिकायतें मिली हैं और गलत एंट्री पर कार्रवाई हो सकती है। एकनॉलेजमेंट सेव करना न भूलें, और किसी बिचौलिए को पैसे बिल्कुल न दें, क्योंकि रजिस्ट्रेशन फ्री है।
किसी भी दिक्कत के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-180-2117 या 1800-180-2060 पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच कॉल करें। इसके अलावा नज़दीकी अटल सेवा केंद्र, CSC या ज़िला कृषि कार्यालय से भी मदद मिल सकती है।
रजिस्ट्रेशन के लिए लॉगिन और ज़मीन की डिटेल्स उठाने में परिवार पहचान पत्र (PPP) काम आता है। इसके साथ किसान क्रेडिट कार्ड से खेती के लिए कम ब्याज पर लोन मिलता है, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रबी एनरोलमेंट आमतौर पर दिसंबर के अंत तक चलता है (राज्य की नोटिफिकेशन ज़रूर देखें), और PM-किसान सम्मान निधि पात्र किसानों को आय सहायता देती है।