लालची बड़ा भाई - नैतिक कहानी हिंदी में - Moral story in Hindi

राज कुमारी 'राजो' 6 मिनट 7/26/2020
लालची बड़ा भाई - नैतिक कहानी हिंदी में - Moral story in Hindi

लालची बड़ा भाई एक नैतिक कहानी है जो हमें सिख देती है की हम कभी भी लालच नहीं करना चाहिए। लालची आदमी धोखा ही खाता है लालच बुरी बला होता है।

धरमपुर, एक छोटी सी गांव की कहानी है। उस गांव में एक बिल्टु नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसकी पत्नी और दो लड़का था। बड़ा लड़का रामु और छोटा दीनु। बरा 7 साल और छोटा 5 साल का था।

किसान किसी भी गृहस्त के खेत में हल चलाता, धान की रोपनी का काम कर लेता, और वो बहुत ही ईमानदार व्यक्ति था। उसे बचपन से ही टीबी की बीमारी थी। उसकी पत्नी लोगो के घरों में बर्तन मांजने का काम करती थी।

एक दिन की बात है, किसान खेत में हल चलाते हुए दम तोड़ दिया, गांव वाले सब मिलकर उनका दाह संस्कार कर दिया उसके बाद किसी तरह चौका बर्तन कर बिल्टु के दोनों बच्चों को पालती थी। 5 साल के बाद वह भी मर गई, दोनों बच्चे अनाथ हो गया दोनों भाई किसी तरह दुकान में नौकरी करने लगा और किसी तरह अपना भरण पोषन करने लगा।

एक दिन रविवार के रोज़ रामु अपना छोटा भाई दीनु से कहा चलो हम दोनों भाई जायदाद का बैठकर बंटवाराकर लेते है। दीनु बोला क्या बोल रहे हैं हम किससे बँटवारा करेंगे, हमें बँटवारा नहीं करना है। भैया और भाभी बोली अभी कर लीजिए तो बहुत अच्छा रहेगा।

रामु बोला मेरे पास है क्या? एक भैंस, एक कम्बल है और एक छोटा सा खजूर का पेड़ है, घर में सब मिलकर रहते ही हैं। बहुत जिद करने पर दीनु बोला ठीक है भैया आपकी जैसी मर्जी।

रामु भैया बोले, भैस को अगर बेच देंगे तो माँ बाबूजी की निशानी ख़त्म हो जाएगा, इसी लिए भैस का पेट से लेकर मुँह तक तुम्हारा हिस्सा हुआ। तुम को खिलाना, पानी पिलाना आदि सब करना होगा। आधा पेट से पीछे पूछ तक मेरा हिस्सा हुआ, भैंस का गोबर हम उठाएंगे।

दूसरा सामान कम्बल है उसको अगर आधा फाड़ देते हो तो दोनों भाई में किसी को काम नहीं होगा, इसलिए दिन में कम्बल तुम रखना और रात में हमे दे देना।

तीसरा सामान खजूर का पेड़ रह गया अगर पेड़ को काट कर बाटोगे तो बाबू जी की निशानी खत्म हो जाएगी। इसलिए खजूर पेड़ का नीचे से लेकर बीच तक तुम्हारा हिस्सा हुआ और बीच पेड़ से ऊपर तक मेरा हुआ और दोनों भाई इसी घर में गुजरा कर लेंगे।

दिनु भैंस को दिन से रात तक खाना पानी देता था 6 बजे से 6 बजे शाम तक कम्बल रखता था और फिर 6 बजे शाम के बाद रामु को दे देता था खजूर के पेड़ में पानी देना दिनु का काम था।

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थोड़ा दिन बाद भैंस का बच्चा हुआ 5 दिन बाद दूध देने लगा। रामु, दोनों पति-पत्नी एक बच्चा था सब मिलकर दूध दही खाता था। थोड़ा दूध वो दूसरे आदमी से बेच देता था। छोटा भाई दिनु को कभी भी एक गिलास दूध भी नहीं मिलता था क्योंकि दिनु का हिस्सा तो भैस के मुँह के तरफ का था, तो दूध कैसे मिलेगा। सिर्फ उसका काम मुँह में चारा खिलाना था।

ठंडा का समय आया तो कम्बल भर दिन दीनु रखता रात में कम्बल रामु ओढ़ता क्योंकि दीनु का हिस्सा तो दिन भर का था। जब खजूर का पेड़ बरा हुआ तब उसमे फल हुआ तो पूरा फल तोड़ कर रामु ले गया, क्यों की दीनु हिस्सा तो पेड़ के जड़ का था।

ऐसे ही बहुत दिनों तक चलता रहा।

कुछ महीनों के बाद दीनु की शादी एक समझदार लड़की ब्रिंदा से शादी हो गया। लड़की गरीब पढ़ी लिखी और सज्जन थी। एक साल तक लड़की घर की यही कहानी देखती रही और बड़ी जेठानी के साथ समय गुजारी रही ।

थोड़े दिन बाद उसके पेट में एक बच्चा रह गया, उस स्थिति में भी उसे कभी दूध नहीं मिलता था। एक दिन ब्रिंदा ने अपने पति दिनु से कहा, आप भैंस का पूरा देखरेख करते है और कभी भी आप को एक ग्लाश दूध भी नहीं मिलता है तो इस बटबारा से आपको कौन सा मदद मिलता है। आप भइया से कहिये फिर से बटबारा करने के लिए। दीनु बोला मुझमे इतनी हिम्मत नहीं है।

ब्रिंदा बोली आपका हिस्सा भैंस के मुँह तरफ है न तो भैया जब दूध निकालने जाएंगे तब आप भैंस के मुँह में घास डालकर और फिर उसी के मुँह पर चार लाठी मारिएगा। अगर भैया कुछ बोले तो कहिएगा की भैंस का मुँह तो हमारा हिस्सा में पड़ा है बहुत सेबा कर लिए है आज थोड़ा मारने का मन कर रहा है। माघ का महीना है कम्बल तीन बजे दिन में सब दिन धो कर ऱख दिजिये। 6 बजे शाम से भैया अपना कम्बल ओड़ेंगे। खजूर के पेड़ में फल लगा है, आप पेड़ के जड़ में बबूल का काटा चारोतरफ से बाँध दिजिये क्यों की आपका हिस्सा में तो पेड़ का जड़ है।

ऐसा करने से भैया ख़ुद ही फिर से बटबारा कर देंगे आपको कुछ कहना भी नहीं पड़ेगा। अब दीनु अपने पत्नी के कहे अनुसार सब कुछ करने लगा। रामु बोला, अरे दीनु ये क्या कर रहा है? तब दीनु बोला, भैया कुछ भी तो नहीं, जो कर रहा हूँ मै अपने हिस्सा में कर रहा हूँ। तब रामु बोला, अब तूम समझदार हो गया है अब फिर से बटबारा करना पड़ेगा।

रबिबार को दोनों भाई बैठ कर फिर से बटबारा करते है।

दीनु बोला भइया मुझे समझ में नहीं आता, अपने मुहल्ले के चार लोगों को बैठा कर कर लिजिये तो ठीक है।

चार आदमी को बुला कर लाया, अपने दरवाज़े पर बैठा घर की पूरी कहानी दोनों भाई कह सुनाया। तब चारो पँचो ने घर की कहानी सुनकर दंग रह गये। पंच बोले दीनु के साथ तुम लोग बहुत ही नाइंसाफी किये हो। बड़ा भाई होकर छोटे भाई के साथ भैस बटबारा होता है | अब तुम लोग ध्यान से सुनो खजूर का पेड़ और कम्बल रामु के हिस्से में, भैस और भैस का बच्चा दीनु के हिस्सा में पड़ा, घर में दोनों भाई मिलकर रहेगा। पंचो ने बटबारा का कागज बना कर दे दिये और जाते जाते आसीर्बाद भी दिये |

दीनु और दीनु की पत्नी भैस की सेबा कर दूध, दही बेच कर बहुत खुशहाल हो जीबन बिताने लगे । बड़ा भाई रामु का परिबार दुःखी हालात में मेहनत मज़दूरी करके जीवन बिताने लगे।

इसीलिए भई किसी दूसरे का हक मरोगे तो दुःखी रहोगे। लालच करना, भले आदमी को बेवकूफ़ बनाना अपने ही जीबन में गढ़ा खोदने के बराबर होता है।