
Realme 15 Pro Review: AI Party Killer स्मार्टफोन जो देगा स्टाइल और पावर का परफेक्ट मिश्रण
Realme 15 Pro Review: AI Party Killer Smartphone जो लाए शानदार डिज़ाइन, कैमरा और बैटरी का परफेक्ट संगम
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में हर दिन नई खोज और रिसर्च सामने आ रही हैं। लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी ने AI टूल्स के इस्तेमाल को लेकर ऐसा खुलासा किया है, जो हर यूजर को सोचने पर मजबूर कर देगा। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की लेटेस्ट स्टडी में पाया गया कि ChatGPT जैसे जेनरेटिव AI टूल्स का ज्यादा इस्तेमाल आपके दिमाग की मेमोरी और क्रिएटिव थिंकिंग को कमजोर कर सकता है। इस रिसर्च ने स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स और टीचर्स के बीच AI के रोल पर एक बड़ी डिबेट छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या AI टूल्स हमारी प्रोडक्टिविटी बढ़ा रहे हैं या फिर हमारे दिमाग को आलसी बना रहे हैं?
रिसर्च में 20 से 35 साल के 60 वॉलंटीयर्स को शामिल किया गया। इन्हें तीन ग्रुप्स में बांटा गया:
रिसर्चर्स ने EEG डिवाइसेज का यूज करके हर पार्टिसिपेंट की ब्रेन एक्टिविटी को मॉनिटर किया। इससे यह पता चला कि टास्क के दौरान उनका दिमाग कितना एक्टिव था।
रिसर्च के नतीजे हैरान करने वाले थे:
ChatGPT यूजर्स की ब्रेन एक्टिविटी सबसे कम थी। उनके निबंधों में डेप्थ और इमोशन की कमी देखी गई। कई यूजर्स ने सिर्फ AI के जेनरेटेड कंटेंट को कॉपी-पेस्ट किया, बिना उसमें कोई चेंज किए। उनकी ब्रेनवेव्स ने दिखाया कि वे टास्क में मेंटली इनवॉल्व ही नहीं थे।
No-Tech ग्रुप ने सबसे ज्यादा मेंटल एक्टिविटी दिखाई। उनके दिमाग के क्रिएटिविटी, फोकस और मेमोरी से जुड़े हिस्से सबसे ज्यादा एक्टिव थे। इन यूजर्स ने अपने काम पर प्राइड और सैटिस्फैक्शन भी फील किया।
Google सर्च ग्रुप ने भी ChatGPT ग्रुप से बेहतर परफॉर्म किया। एक्टिवली इन्फॉर्मेशन सर्च करने से उनका दिमाग ज्यादा स्टिमुलेटेड रहा।
लीड रिसर्चर डॉ. अमित शर्मा ने बताया, “AI टूल्स सुविधाजनक हैं, लेकिन इन पर ओवर-डिपेंडेंसी दिमाग के डेवलपमेंट को रोक सकती है, खासकर यंग एज में।” स्टडी में पाया गया कि AI पर डिपेंड करने वाले यूजर्स की मेमोरी रिटेंशन कम हुई और वे अपने टास्क्स से इमोशनली डिस्कनेक्टेड फील करते थे। इसके उलट, जो लोग बिना AI के काम करते थे, उनकी कॉग्निटिव स्किल्स में इम्प्रूवमेंट देखा गया।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI टूल्स को स्मार्टली यूज करना जरूरी है। “AI को एक असिस्टेंट की तरह यूज करें, न कि अपने दिमाग का रिप्लेसमेंट,” प्रोफेसर रिया कपूर ने सुझाव दिया। वे कहती हैं कि स्टूडेंट्स को क्रिटिकल थिंकिंग और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स डेवलप करने के लिए AI का यूज बैलेंस करना चाहिए।
यह स्टडी एक वेक-अप कॉल है। ChatGPT जैसे AI टूल्स प्रोडक्टिविटी को बूस्ट कर सकते हैं, लेकिन इनका ज्यादा यूज हमारे दिमाग को सुस्त कर सकता है। खासकर स्टूडेंट्स और यंग प्रोफेशनल्स को चाहिए कि वे टेक्नोलॉजी और अपनी क्रिएटिविटी के बीच बैलेंस बनाएं। अगली बार जब आप ChatGPT यूज करें, तो सोचें—क्या आप अपने दिमाग को चैलेंज दे रहे हैं या सिर्फ शॉर्टकट ले रहे हैं?